भगवान शिव जी के आश्चर्यचकित एवं रोचक रहस्य

  • भगवान शिव जी के आश्चर्यचकित एवं रोचक रहस्य

शिव जी के गले में जो नाग लिपटा रहता है उसका नाम वासुकी है एवं वासुकी के बड़े भाई का नाम शेषनाग है।
सर्वप्रथम शिव जी ने ही धरती पर जीवन के प्रचार-प्रसार का प्रयास किया था इस कारण से इन्हे ‘आदि देव’ भी कहा जाता है। आदि का अर्थ है ‘प्रारंभ’। आदिनाथ होने के कारण इनका एक और नाम ‘आदिश’ भी है।

शिव जी के प्रमुख 6 पुत्र है-

गणेश, कार्तिकेय, सुकेश, जलांधर, अयप्पा और भूमा। इसके साथ ही सभी के जन्म की कथा भी रोचक है।
शिव जी के सात (7) शिष्य हैं जिन्हें प्रारंभिक सप्तऋषि माना गया है। इन सभी ऋषियों ने ही शिव जी के ज्ञान को संपूर्ण धरती पर प्रचारित किया था। जिसके कारण भिन्न-भिन्न धर्म और संस्कृतियों की उत्पत्ति हुई। इसके साथ ही शिव जी ने ही गुरू और शिष्य परंपरा की शुरूआत की थी।
शिव जी ने भस्मासुर से बचने के लिए एक पहाड़ी में अपने त्रिशुल से एक गुफा बनाई और वे फिर उसी गुफा में छिप गए। वह गुफा जम्मू से 150 किलोमीटर दूर त्रिकूटा की पहाड़ियों पर स्थित है दूसरी तरफ भगवान शिव जी ने जहाँ पार्वती जी को अमृत ज्ञान दिया था वह गुफा अमरनाथ गुफा के नाम से प्रसिद्ध है।

तिब्बत के पास स्थित कैलाश पर्वत पर शिव जी का निवास स्थान है। जहाँ पर शिव विराजमान रहते हैं और उस पर्वत के ठीक नीचे पाताल लोक है जो भगवान विष्णु जी का स्थान है। शिव जी के आसन के ऊपर वायुमंडल के पार क्रमशः स्वर्ग लोक और उसके बाद ब्रह्माजी का स्थान है।

शिव जी की भक्ति हेतु शिव जी का ध्यान-पूजन किया जाता है। शिव लिंग पर बिल्व पत्र चढ़ाकर शिवलिंग के समीप मंत्र जाप या ध्यान करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है।

शिव मंत्र

शिव जी के दो ही मंत्र है-
पहला– ओम नमः शिवाय।

दूसरा महामृत्युंजय मंत्र –

ओम हृौं जू सः
ओम भूर्भुवः स्वः
ओम न्न्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टि वर्धनम्।
उर्वा रूकमिव बंधनान् मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्।
स्वः भूभुर्वः भूः ओम। सः जू हौं ओम।।

अमरनाथ के अमृत वचन
शिव जी ने अपनी अर्धागिनी पार्वती जी को मोक्ष की प्राप्ति हेतु अमरनाथ की गुफा में जो ज्ञान दिया उस ज्ञान की आज अनेकानेक शाखाएं है। यह ज्ञान योग और तंत्र के मूल सूत्रों में शामिल है। ‘विज्ञान भैरव तंत्र’ एक ऐसा ग्रंथ है, जिसमें भगवान शिव द्वारा पार्वती जी को बताए गए 112 ध्यान सूत्रों का संकलन है।

शिव जी का दर्शन
शिव जी के जीवन और दर्शन को जो लोग यर्थाथ दृष्टि से देखते हैं वे सही बुद्धि वाले और यथार्थ को पकड़ने वाले शिव भक्त हैं, क्योंकि शिव का दर्शन कहता है कि यथार्थ में जियों, वर्तमान में जियो अपनी चित्तवृत्तियों से लड़ों मत उन्हेें अजनबी बनकर देखों और कल्पना का भी यथार्थ के लिए उपयोग करो।

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